अपना गम लेके कहीं और न जाया जाये
घर में बिखरी हुई चीजों को सजाया जाये
जिन चिरागों को हवाओं का कोई खौफ नही
उन चिरागों को हवाओं से बचाया जाये
बाग़ में जाने का अदब हुआ करते हैं
किसी तितली को फूलों से न उड़ाया जाये
खुदखुशी करने की हिम्मत नहीं होती सब में
और कुछ दिन यूँ ही औरों को सताया जाये
Friday, September 17, 2010
Thursday, September 16, 2010
दुश्मनी को करीब मत करना
दुश्मनी को करीब मत करना
ग़म को अपना नसीब मत करना
मेरे अल्लाह इस ज़माने में
आदमी को गरीब मत करना
दुश्मनों से वफ़ा मिलेगी तुम्हे
दोस्तों को रकीब मत करना
दिले ज़ख्मों पे मरहम के लिए
दोस्तों को ताबीब मत करना
दिल जो दो किसी को नाज़ुक तो
उसको या रब अदीब मत करना
ग़म को अपना नसीब मत करना
मेरे अल्लाह इस ज़माने में
आदमी को गरीब मत करना
दुश्मनों से वफ़ा मिलेगी तुम्हे
दोस्तों को रकीब मत करना
दिले ज़ख्मों पे मरहम के लिए
दोस्तों को ताबीब मत करना
दिल जो दो किसी को नाज़ुक तो
उसको या रब अदीब मत करना
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